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Sunday, March 08, 2009

फूSSS

कमरे की हवा
को न जाने क्या हुआ

पंखे से दामन छुड़ाकर
कभी बिस्तर पे लेटती
कभी कपडों में छिप जाती

कैलेंडर
को गुदगुदाकर
उसे हँसता छोड़ जाती

झटके
भर में सरसराकर
पढ़ लिया पूरा अखबार
चादर पे गिरती फिसलती
कभी साकार कभी निराकार

अभी जो धीमे से
चेहरे को छूकर बालों से गुजरी
तो लगा उसने हाथ बढ़ाया

जब हवाओं में हो
इतनी खिलखिलाहट
हमारी कलम को क्या पता
हमने क्या खोया क्या पाया

Monday, January 05, 2009

Emosanal Attyachar. Patna ke Presley's

Gawd. Gawd. Gawd. I accept defeat on behalf of Tapti Drams. It's more country, more cheap and entertaining like Laloo himself. Bolo countriyaapa bhagwaan ki....

Sunday, November 16, 2008

लालाजी

एक थे प्यारे लालाजी
पहनते थे वह पजामा जी
शान से निकलते
पैदल गाड़ी पे सवार होके
नयनों पे चश्मा
कुर्ता कभी नहीं अपना
तोंद का व्यास
था पचपन के पास
उनकी मूँछ
लगती गाय की पूंछ
सर पे चांद यूं चमकायें
करवा चौथ का व्रत पूरा हो जाए
ज्यों ही सड़क पे कदम रखते
पतली गली के कुत्ते पकड़ लेते
केले के छिलकों पे गिरते-फिसलते
बचते बचाते दुकान पहुँचते
लाला की दुकान
नीची दुकान फीके पकवान
आटे-दाल का भाव
भगा देता था उल्टे पांव...

Can't remember the rest of the lines.
One of my first poems, written in class 8th.

Friday, October 12, 2007

?

रेत की आंधी
खुली आँखें
आगे बढ़ना है।

चिलचिलाती धूप
नंगे तलवे
रास्ता तय करना है।

चुभता पसीना
सूखी प्यास
चलते रहना है।

चार दिशाएँ
चिथड़ों में नक्शा
वहाँ पहुँचना है।

न कोई पास
न मदद की आस
अकेले तय करना है।

मिट्टी का आकाश
मिट्टी की हवा
मिट्टी को जीतना है।

शक्तिहीन तन
दुखती टांगें
मीलों को पीछे छोड़ना है।

मन में एक आग
आँखों में नशा
हर हाल में करना है।

पर क्यूँ
कौन हूँ मैं
आखिर क्या करना है?

Wednesday, August 22, 2007

मेरा नंबर कब आयेगा?


अकेला था जीवन में रिलायंस की कसम
लगती थी गुरु की चाय में चीनी कम
मेरी हीरो जेट हो गयी थी खटारा
पैराशूट तेल सर पे लगाता ढेर सारा

पहन के पैरागौन के चप्पल, सारंग की टीशर्ट
रोज़ सुबह रिबौक पहन भागता था सरपट
एक दिन ड्यूरासेल की तरह चलता ही गया
सी.आर.सी. पहुँचने का बनाया रिकार्ड नया

फिर भी पहुँचा एयर-डेक्कन की तरह लेट
प्रौफ की पैंट पे लगा था एशियन पेंट
लिप-गार्ड की मुस्कान के साथ बैठा बेंच पर
बगल में बैठी फेयर ऐन्ड लवली देख घूम गया सर

फ्रांस की सुंदरी के बगल में मिस्टर इंडिया
दोनों की खूबसूरती का राज़ लक्स और क्या
क्या सेट्-मैक्स लग रही थी जो दीवाना बना दे
नज़र लगे कोई उसे गोदरेज के लौकर में छिपा दे

विक्स की गोली खा मैंने कहा हाय
मेरी लाईफ में तुम रेडियो-मिर्ची की तरह आये
मैं हूँ तेरा सर्फ तू मेरी सुपर निरमा
मैं रिडर्स डाईजेस्ट तू मेरी मनोरमा

हमारा प्यार फेविकौल का जोड़ टूटेगा नहीं
चल डी.एल.एफ. का घर बनाएँ दूर कहीं
सौदा कच्चा नहीं यह है बबूल-बबूल पैसे वसूल
तुम भी कहोगी क्या बात है साड़ी हो तो प्रफुल

सच्चा प्यार है ओंकार रामायण अगरबत्ती
हाजमोला कैन्डी की तरह कुछ खट्टी कुछ मीठी
यह प्रियागोल्ड बिस्किट इसे हक से मांगो
हच के कुत्ते की तरह मैं तेरे पीछे चाहे कहीं तुम भागो

रूखेपन से कहा उसने कहाँ तू बाटा कहाँ मैं टाटा
दिखावे पे जाओ अपनी अकल लगाओ मैंने डाँटा
बोली तू तो बड़ा टाईन है मेरे अमूल माचो
सोनी एरिक्सन बजा ऋतिक के माफिक नाचो

मंजूर है तेरा प्यार जो स्प्राईट की तरह है क्लियर
तभी कोई चिल्लाया अटेंडेंस है क्लिनिक ऑल क्लियर
गुड नाईट के सपने से जाग और साईन कर
कायमचूर्ण के राक्षस टी.ए. ने कहा हँसकर

सपने हुए चूर जाने मेरा दुख किस झन्डु बाम से जायेगा
पेप्सी पीते हुये यही सोचता हूँ कि मेरा नंबर कब आयेगा

Saturday, October 21, 2006

शुभ दीपावली


आज मन ने इक बात कही
कि द्रुत गति से भाग रही
जीवन की रेलगाडी की
फिर चेन खींची जाये,
खुशी नगर के बीच चौराहे
आओ दिव्य दिवाली मनायें|


उत्तर दक्खिन पूरब पश्चिम
माँ लक्ष्मी की आरती गायें,
शुभ गणपति के राग पे
श्रद्धा की बंसी बजायें,
श्री राम के लौटने की ख़ुशी में
आओ दिव्य दिवाली मनायें|


अमावस की कालिमा पर
डाल दें प्रकाश की चादर,
जला दें दीप इतने ढेर सारे
दूर आसमां में कहीं जल उठें तारे,
देख धरती की सुंदरता, छिपा चांद शरमाये
आओ दिव्य दिवाली मनाएं|